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सिर्फ एक मच्छर... और अस्पताल तक पहुँचने की नौबत! जानिए डेंगू और चिकनगुनिया से बचने के आसान उपाय



मानसून का मौसम अपने साथ हरियाली और ठंडक लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इनमें डेंगू और चिकनगुनिया सबसे प्रमुख हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत के विभिन्न राज्यों में इन दोनों बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान, उचित उपचार और बचाव के उपाय अपनाकर इन बीमारियों से होने वाले गंभीर प्रभावों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

डेंगू और चिकनगुनिया क्या हैं?

डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही वायरल रोग हैं, जो मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) नामक मच्छर के काटने से फैलते हैं। यह मच्छर दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है और साफ एवं रुके हुए पानी में पनपता है। घरों के आसपास रखी पानी की टंकियाँ, गमले, कूलर, पुराने टायर, डिब्बे और अन्य खुले बर्तन इसके प्रजनन स्थल बन सकते हैं।

हालाँकि दोनों बीमारियाँ एक ही प्रकार के मच्छर से फैलती हैं, लेकिन इनके लक्षण और प्रभाव कुछ अलग होते हैं।

डेंगू के प्रमुख लक्षण

डेंगू होने पर मरीज में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • तेज बुखार (104°F तक)

  • सिरदर्द

  • आँखों के पीछे दर्द

  • शरीर और जोड़ों में तेज दर्द

  • त्वचा पर लाल चकत्ते

  • मतली और उल्टी

  • अत्यधिक कमजोरी

  • गंभीर मामलों में प्लेटलेट्स की संख्या कम होना और रक्तस्राव होना

यदि समय पर उपचार न मिले तो डेंगू जानलेवा भी साबित हो सकता है।

चिकनगुनिया के प्रमुख लक्षण

चिकनगुनिया के लक्षण भी लगभग डेंगू जैसे होते हैं, लेकिन इसमें जोड़ों का दर्द अधिक गंभीर होता है।

मुख्य लक्षण हैं—

  • तेज बुखार

  • हाथ-पैर और घुटनों के जोड़ों में असहनीय दर्द

  • मांसपेशियों में दर्द

  • त्वचा पर चकत्ते

  • सिरदर्द

  • थकान और कमजोरी

कई मरीजों में जोड़ों का दर्द कई सप्ताह या महीनों तक बना रह सकता है।

बढ़ते मामलों के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों में वृद्धि के कई कारण हैं—

  1. मानसून के दौरान जलभराव।

  2. घरों और आसपास साफ-सफाई की कमी।

  3. रुके हुए पानी को समय पर न हटाना।

  4. शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी।

  5. लोगों में जागरूकता की कमी।

  6. मच्छर नियंत्रण कार्यक्रमों का पर्याप्त प्रभावी न होना।

किन लोगों को अधिक खतरा?

यद्यपि यह बीमारी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक होता है—

  • छोटे बच्चे

  • बुजुर्ग

  • गर्भवती महिलाएँ

  • मधुमेह, हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति

बचाव के उपाय

डेंगू और चिकनगुनिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों से बचाव करना है।

1. पानी जमा न होने दें

  • कूलर का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार बदलें।

  • गमलों की प्लेटों में पानी जमा न होने दें।

  • पानी की टंकियों को हमेशा ढककर रखें।

  • पुराने टायर, बोतलें और डिब्बों में पानी न रुकने दें।

2. मच्छरों से सुरक्षा

  • पूरी बाँह के कपड़े पहनें।

  • मच्छरदानी का उपयोग करें।

  • मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे लगाएँ।

  • घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएँ।

3. साफ-सफाई रखें

  • घर और आसपास नियमित सफाई करें।

  • नालियों को साफ रखें।

  • कचरा खुले में न फेंकें।

बीमारी होने पर क्या करें?

यदि तेज बुखार या डेंगू जैसे लक्षण दिखाई दें तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ लें।

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें।

  • बिना सलाह के दर्द निवारक दवाइयों का सेवन न करें।

  • यदि प्लेटलेट्स तेजी से कम हो रहे हों या रक्तस्राव हो रहा हो तो तुरंत अस्पताल जाएँ।

  • पर्याप्त आराम करें।

क्या प्लेटलेट्स कम होने पर घबराना चाहिए?

डेंगू में प्लेटलेट्स कम होना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर घबराना उचित नहीं है। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति, रक्तचाप, रक्तस्राव और अन्य जाँचों के आधार पर उपचार तय करते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती।

सरकार और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका

स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर मच्छर नियंत्रण अभियान चलाता है। फॉगिंग, लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई, जनजागरूकता अभियान और नियमित निगरानी के माध्यम से डेंगू एवं चिकनगुनिया को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दे तथा स्वच्छता बनाए रखे।

समाज की जिम्मेदारी

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव केवल व्यक्तिगत प्रयास से संभव नहीं है। यदि किसी एक घर में भी पानी जमा रहता है तो पूरे मोहल्ले में मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए सभी लोगों को मिलकर सफाई अभियान चलाना चाहिए और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करना चाहिए।

डेंगू और चिकनगुनिया ऐसी बीमारियाँ हैं जिनसे सावधानी और स्वच्छता अपनाकर काफी हद तक बचा जा सकता है। मानसून के मौसम में विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएँ तथा तेज बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। समय पर उपचार और जागरूकता ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो डेंगू और चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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